श्रमिक कुंज के फ्लैट और दुकानें दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी

loktantranews:नोएडा सेक्टर-122 में प्राधिकरण की ओर से बनाए गए श्रमिक कुंज के फ्लैट और दुकानें दिलाने के नाम पर ठगने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने सेक्टर-8 से गिरफ्तार किया है। आरोपियों से सेक्टर-24 थाना पुलिस ने प्राधिकरण के फर्जी अलाटमेंट लेटर समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। नोएडा सेक्टर-8 निवासी मुख्य आरोपी संजय कुमार सिंह 2002 में प्राधिकरण में एक कंपनी की ओर से काम कर चुका है। पीड़ितों को संजय खुद को प्राधिकरण का कर्मी बताते हुए अधिकारी के नजदीक होने का झांसा देकर ठगता था। आरोपी ने छोटे-छोटे काम करने वाले लोगों को आशियाना दिलाने का सपना दिखाया और 50 से अधिक लोगों से पैसे ऐंठ लिए। नोएडा जोन के एसीपी द्वितीय रजनीश वर्मा ने बताया कि गिझोड़ में सैलून चलाने वाले सोमपाल श्रीवास्तव की गली नंबर-24 मुल्ला कॉलोनी घड़ोली थाना गाजीपुर, दिल्ली निवासी फारूख से जान पहचान थी। वह अक्सर कटिंग कराने के लिए आता था। फारूख ने बात ही बात में सोमपाल को नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-122 में फ्लैट व दुकानें अलॉट कराने की बात कही। इस पर सोमपाल राजी हो गया तो फारूख ने 2019 में सेक्टर-8 स्थित जेजे कॉलोनी निवासी संजय से मिलवाया। उसने दावा किया प्राधिकरण में वह नौकरी करता है और आला अधिकारियों से बेहद अच्छे संबंध हैं।
कुछ पैसे खर्च करने पर वह फ्लैट और दुकान अलॉट करा देगा। संजय और फारूख के झांसे में आकर सोमपाल ने करीब आठ लाख रुपये दे दिए। इसी तरह फारूख अन्य लोगों को तैयार करके संजय के पास ले जाता था। दोनों आरोपी मिलकर लोगों से पैसे लेकर फर्जी कागजात तैयार कर लोगों को फ्लैट और दुकान दिलाने के नाम पर ठगते थे।जब एक के बाद एक कई लोगों को ठगा और दुकान-फ्लैट नहीं मिले तो 7 पीड़ित प्राधिकरण में पहुंच गए जहां पर पता चला कि संजय और फारूख ने उनसे धोखाधड़ी कर फर्जी दस्तावेज दिए हैं। पीड़ितों की मुलाकात प्राधिकरण में हुई तो सभी ने मिलकर सेक्टर-24 कोतवाली में शिकायत दी। थानाध्यक्ष प्रभात दीक्षित ने टीम के साथ शनिवार को सेक्टर-8 से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पीड़ितों से जब अधिकारियों ने दस्तावेज देखे तो दंग रह गए। प्राधिकरण के दस्तावेज की तरह ही आरोपियों ने फर्जी कागज तैयार किए थे। इनमें प्राधिकरण के लेटरपैड और पैसे जमा करने की रसीद से लेकर अलॉटमेंट लेटर तक सभी हूबहू थे। हालांकि , प्राधिकरण अधिकारियों को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन उन्होंने पीड़ितों को ही थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *