ट्रेड यूनियन ने कामगारों के लिए मांगा भरण पोषण भत्ता

गौतमबुद्धनगर।  जिले के करीब तीन लाख असंगठित कामगार मजदूरों को कोरोना संक्रमण काल में सरकार से आर्थिक मदद दिलाने के लिए इंडियन ट्रेड यूनियन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। यूनियन ने इसके लिए स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन व संबंधित विभाग के अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी पत्राचार के माध्यम से स्थिति से अवगत कराया है। जिसमें असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पंजीकृत करने के लिए आवश्यक कदम उठाने समेत तमाम तरह की सुविधाएं मुहैया कराने के साथ कम से कम 7500 रुपये भरण पोषण भत्ता दिए जाने की मांग की है। ट्रेड यूनियन गौतमबुद्धनगर के अध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा ने बताया कि उन्होंने यूनियन के तरफ से दिहाड़ी मजदूरों, रेहड़ी पटरी दुकानदार, पथ विक्रेताओं, निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगार महिलाओं, रिक्शा, ऑटो चालको, असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सरकारी मदद दिलाने के लिए जिले के आलाधिकारियों समेत प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा है। जिससे इन मजदूरों को कोरोना संक्रमण के मुश्किल घड़ी में आर्थिक मदद दिलाई जा सकें।

ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष ने कहा कि जिन मजदूरों ने खून पसीने बहा कर शहर को बसाया है, यहां मौजूद सुख सुविधाएं विकसित की, सरकारी उदासीनता के कारण उन्हीं के लिए आज तक कोई कारगर योजनाएं नहीं बन पाई है। भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों को पंजीकृत करने की योजनाएं हैं, लेकिन रेहड़ी पटरी, घरेलू कामगार महिलाएं, ऑटो, रिक्शा चालकों जैसे मजूदरों के लिए कहीं भी पंजीकृत करने की सुविधा नहीं हैं। जिसके वजह से इनके लिए सरकारी योजना न तो बन पाती है, न ही किसी प्रकार का लाभ मिल पाता है। ये मजदूर हमेशा से उपेक्षित रहें हैं। सरकार से इन मजदूरों के लिए कम से कम 7500 रुपये भरण पोषण भत्ता दिए जाने की मांग की गई है।

यूनियन ने जिले के फैक्टरी मालिकों से अनुरोध किया है कि मुश्किल के घड़ी में जहां अस्पताल के बाहर लोग दम तोड़ रहे हैं। इस स्थिति में मजदूरों को नौकरी से निकालने के बजाए, उन्हें आर्थिक के साथ घरेलू मदद करें। उनके लिए राशन में राशन में चावल, आटा, दाल, तेल, नमक, चीनी, मसाले, चना, मास्क, सैनिटाइजर मुहैया कराएं। इसी तरह की मांग सरकारी अमले से भी की गई है, ताकि जीवन यापन के साथ संक्रमण से भी बचाव हो सकें।

असंगठित कामगार मजदूरों की हर जगह अनदेखी की जा रही है। इन मजदूरों को पंजीकृत करने की सुविधा नहीं हैं, जिस कारण अधिकांश योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। यूनियन इन्हें पंजीकृत कराने के साथ सरकारी योजनाओं की मदद दिलाने का प्रयास कर रही है।- गंगेश्वर दत्त शर्मा, अध्यक्ष सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन गौतमबुद्धनगर।

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